1. DHUANDHAR WATERFALLS

    Narmada makingh its way through the marbal rocks ,narrows down and then plunges in a waterfall known as dhuandhar or the smoke cascade. So powerful is the plunge that its roar is heard from a far distance. The falls and the breaking of the volume of water at the crest present an awesome spectacle of Nature’s power unleashed.

  2. CHAUSATH YOGINI TEMPLE

    भारत में कई स्थान विविधताओं और रहस्यों को समेटे हुए हैं। इनमें कई चीजें ऐसी भी हैं, जो लोगों का आश्चर्य चकित कर देती हैं। इन्हीं में शुमार है जबलपुर का भेड़ाघाट स्थित 64 योगिनी मंदिर...। इस मंदिर में आज भी चौसठ योगिनियां (प्रतिमाएं) पहरा देती नजर आती हैं। कभी तंत्र साधना के लिए पूरे विश्व में विख्यात रहा यह मंदिर काल गणना का भी केन्द्र रहा। इसे गोलकी मठ के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर के मध्य में शिव-पार्वती के वृषभ (बैल) पर सवार आलौकिक प्रतिमा है, जिसके दर्शन के लिए नवरात्रि में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। त्रिभुजी कोण मंदिर में योगिनियों की खंडित मूर्तियां हैं, जो सिर्फ देशी ही नही विदेशी पर्यटकों के लिये भी आकर्षण का केंद्र हैं

  3. MARBLE ROCKS

    The Marble Rocks is an area along the Narmada river in central India near the city of Jabalpur in Jabalpur District of Madhya Pradesh state. The river has carved the soft marble, creating a beautiful gorge of about 3 km in length. Marble is a metamorphic rock composed of recrystallized carbonate minerals, most commonly calcite or dolomite. Marble may be foliated.

  4. LAKSHMI NARAYAN TEMPLE LAMHETA

    भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित है। अश्वमेध यज्ञ : राजा बलि ने विश्वविजय की सोचकर अश्वमेध यज्ञ किया और इस यज्ञ के चलते उसकी प्रसिद्धि चारों ओर फैलने लगी। अग्निहोत्र सहित उसने 98 यज्ञ संपन्न कराए थे और इस तरह उसके राज्य और शक्ति का विस्तार होता ही जा रहा था, तब उसने इंद्र के राज्य पर चढ़ाई करने की सोची। वामन अवतार : वामन ॠषि कश्यप तथा उनकी पत्नी अदिति के पुत्र थे। वे आदित्यों में बारहवें थे। ऐसी मान्यता है कि वह इन्द्र के छोटे भाई थे और राजा बलि के सौतेले भाई। विष्णु ने इसी रूप में जन्म लिया था। देवता बलि को नष्ट करने में असमर्थ थे। बलि ने देवताओं को यज्ञ करने जितनी भूमि ही दे रखी थी। सभी देवता अमर होने के बावजूद उसके खौफ के चलते छिपते रहते थे। तब सभी देवता विष्णु की शरण में गए।

  5. NARMADA RIVER POOJA (GWARIGHAT)

    Gwarighat is a small town on the banks of the river Narmada near the city of Jabalpur in Madhya Pradesh, India. It is associated with Guru Nanak, the founder of Sikhism.

  6. PASHUPATINATH TEMPLE GOPALPUR (JABALPUR)

    धुँआधार के समीप ही गोपालपुर में राजबली के पुत्र वाणासुर के द्वारा स्थापित भगवान शंकर का एक अद्भूत शिवलिंग है जिसे पशुपतिनाथ के नाम से जाना जाता है | पशुपति नाथ शिवलिंग की प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें एक ही प्रतिबिंब होते हुए चार स्वरूप में दर्शन होते हैं | आप कहेंगे किसके दर्शन होते हैं शिवलिंग के दक्षिणी भाग में भगवान गणेश , पूर्व में शिव शंकर, उत्तर में माँ पार्वती शिव संगिनी एवं पश्चिम में भगवान शेषनाग के दर्शन होते हैं |

  7. BARGI DAM

    Bargi Dam is one of the first completed dams out of the chain of 30 major dams to be constructed on Narmada River in Madhya Pradesh, India.

  8. VISHNU VARAH

    एक दिन भगवान विष्णु अपन वैकुण्ठ निवास में विश्राम कर रहे थे तभी भगवान ब्रह्मा के चार पुत्र उनसे मिलने के लिए आये | उनको द्वार पर पहरा देने वाले दो द्वारपालों जय और विजय ने रोक लिया | उन्होंने ब्रह्मा के पुत्रो को अंदर जाने की अनुमति नही दी क्योंकि उनके स्वामी विश्राम कररहे थे | ब्रह्म पुत्र द्वारपालों की बात सुनकर क्रोधित हो गये और दोनों को श्राप दे दिया कि वो दैवीय पद छोडकर पृथ्वी पर मनुष्य रूप में जन्म लेंगे | कुछ देर बाद भगवान विष्णु द्वार पर पहुचे और जय विजय के व्यवहार के लिए माफी माँगी और उनसे कहा कि वो दोनों तो केवल अपना कर्तव्य निभा रहे थे | इस क्षतिपूर्ति के लिए ब्रह्म पुत्रो ने कहा कि ये श्राप तब हट जाएगा जब जय विजय मानव रूप में भगवान विष्णु के हाथो से मृत्यु प्राप्त करेंगे |

  9. DUMNA NATURE RESERVE

    Dumna Nature Reserve Park is an ecotourism site open to the public located in the Jabalpur district of the Indian state of Madhya Pradesh. It includes a dam, forests and wildlife in a 1058 - hectare area.

  10. KACHNAR CITY

    The Kachnar City is well known for the tourist attraction and religious destination for the locals and the people from abroad because of the tallest statue of Lord Shiva (In Hindi: भगवान शिव) which was build in the year 2004 and was made available for the public from 15 February, 2006.